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Archive for the ‘कविता’ Category

जुगनू
(बीस बरस के उस नौजवान के जज्बात,जिसकी माँ उसी दिन मर गयी जिस दिन वह पैदा हुआ)
ये मस्त-मस्त घटा ये भरी-भरी बरसात
तमाम हद्दे-नजर तक घुलावटों का समाँ!
फ़जा-ए-शाम में डोरे-से पड़ते जाते हैं
जिधर निगाह करें कुछ धुआँ सा उठता है
दहक उठा है तरावट की आँच से आकाश
जे-फ़र्श-ता-फ़लक अँगड़ाइयों का आलम है
ये मद भरी हुई पुर्वाइयाँ सनकती [...]

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कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….
मेरे लिये तुम कौन हो……
कैसे बताऊँ !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
तुम धड्कनॊं का गीत हो,
जीवन का संगीत हो!
तुम जिन्दगी, तुम बन्दगी !
तुम रोशनी, तुम ताजगी!
तुम हर खुशी, तुम प्यार हो !
तुम प्रीत हो, मनमीत हो !
आँखों में तुम, यादों में तुम !
साँसों में तुम, आहों में तुम !
नींदों में तुम, ख्वाबों में तुम [...]

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